क्या होता है
गालुंगन अधर्म पर धर्म की जीत और पूर्वजों की आत्माओं के परिवार के घर लौटने का प्रतीक है। यह बाली कैलेंडर का सबसे महत्वपूर्ण दिन है और हर 210 दिन पर आता है — इसलिए ज़्यादातर कैलेंडर वर्षों में दो बार। सुबह-सुबह परिवार अपने घर के मंदिर में प्रार्थना करते हैं, फिर पैतृक मंदिरों की ओर निकल पड़ते हैं।
आपकी यात्रा पर असर
कई वारुंग, वर्कशॉप, सैलून और परिवार द्वारा चलाई जाने वाली दुकानें एक या दो दिन बंद रहती हैं। होटल, बड़े रेस्तरां और प्रमुख पर्यटन स्थल चालू रहते हैं, हालाँकि कम स्टाफ़ के साथ। पैतृक गाँवों की ओर जाने वाली सड़कों पर सुबह और शाम जाम रहता है, ख़ासकर देनपसार से पूर्व और उत्तर की ओर।
कैसे तैयारी करें
अपने फ़्रंट डेस्क से पूछें कि कौन-से वारुंग खुले हैं, या टूरिस्ट इलाकों में खाने की योजना बनाएँ। अगर आप स्कूटर किराये पर लेते हैं, तो रिपेयर की दुकानों के खुले होने पर भरोसा न करें। एक दिन पहले नकद निकाल लें — लंबी छुट्टियों के दौरान कुछ ATM में दोबारा पैसे नहीं भरे जाते।
आप क्या देख सकते हैं
गाँव की गलियों में कतार से लगे पेंजोर बाली का सबसे सुंदर रूप हैं, और यह नज़ारा सिर्फ़ इसी दौरान दिखता है। बारोंग न्गेलावांग — जिसमें बच्चे घर-घर जाकर बारोंग नृत्य करते हैं — अक्सर गालुंगन के बाद के दिनों में दिखता है।