तेगल्लालांग ज़िले के केदिसान गाँव में स्थित पाकुदुई पारंपरिक गाँव के लगभग 90% निवासी गरुड़ मूर्तियों के कारीगर हैं। यह बात ग्यान्यार प्रशासन ने 26 मई 2016 को गाँव को पर्यटन गाँव "गरुड़ विलेज" घोषित करते समय कही थी। उबुद के आसपास की गैलरियों में बिकने वाले कई लकड़ी के गरुड़ यहीं बनते हैं।
पाकुदुई कहाँ है?
तेगल्लालांग के सीढ़ीदार धान के खेतों से करीब 2 किमी उत्तर, केदिसान गाँव के भीतर। पारंपरिक गाँव छोटा है: Bali Padma Bhuwana (budayabali.com) के अनुसार एक बंजार में 122 परिवार। Google Maps पर देखें
क्या प्रवेश टिकट लगता है?
गाँव में प्रवेश टिकट का कोई रिकॉर्ड नहीं है। वर्कशॉप और गैलरी में दुकान की तरह जा सकते हैं। फिर भी किसी घर के आँगन में जाने या कारीगर की फ़ोटो लेने से पहले पूछ लें।
क्या देख सकते हैं?
- सुआर या कटहल जैसी सख़्त लकड़ी से गरुड़ तराशते कारीगर। लकड़ी को पहले प्राकृतिक रूप से सुखाया जाता है ताकि दरार न आए, और बड़ी मूर्ति में महीनों लग सकते हैं।
- कलाकार इ मादे आदा के परिवार की Ada Garuda गैलरी। ग्यान्यार प्रशासन के अनुसार करीब 50 साल पहले पाकुदुई के गरुड़ को बाली से बाहर पहुँचाने का श्रेय उन्हीं को है। TripAdvisor लिस्टिंग में समय 9:00-17:00 दिया है। कुछ रिव्यू इस परिवार के साथ नक्काशी क्लास का ज़िक्र करते हैं, पर समय और दाम प्रकाशित नहीं हैं, इसलिए सीधे पूछें।
ख़रीदना हो तो?
दाम शायद ही लिखे होते हैं और आकार, लकड़ी और बारीकी पर निर्भर करते हैं। विनम्रता से मोलभाव करें और रसीद लें। बड़ी मूर्तियाँ भारी होती हैं और कार्गो से भेजनी पड़ती हैं। पैकिंग और शिपिंग का ख़र्च दाम तय करने से पहले पूछें, बाद में नहीं।
किसे निराशा होगी?
फ़ोटो स्पॉट ढूँढने वालों को। पाकुदुई काम करने वाला गाँव है: लकड़ी की धूल, छेनी की आवाज़, माल ढोने वाले ट्रक, और कोई पर्यटक सूचना केंद्र नहीं। नक्काशी की ज़्यादा शैलियाँ देखनी हों तो उबुद के दक्षिण में मास गाँव में ज़्यादा गैलरियाँ हैं।
कब जाएँ?
कामकाजी दिनों में सुबह से दोपहर तक, जब वर्कशॉप चालू रहती हैं। ताज़ा काम Instagram सर्च से देख सकते हैं। सुबह जल्दी तेगल्लालांग के खेत देखें, फिर दोपहर के खाने से पहले पाकुदुई रुकें।
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