अमलापुरा से सात किलोमीटर उत्तर, तिर्ता गंगा से लगभग दस मिनट की दूरी पर सड़क सालक के बागों के बीच सँकरी होती है और फिर लगभग 400 मीटर की ऊँचाई पर बसे एक पहाड़ी गाँव में खुलती है — बुदाकेलिंग गाँव (Desa Budakeling), बेबांडेम उपजिला, करंगासेम ज़िला। यह पर्यटकों के कार्यक्रम में लगभग कभी नहीं आता, जबकि यही बाली की सिवा-बुद्ध परंपरा के सबसे पुराने केंद्रों में से एक है और चेलुक की भीड़ से दूर काम करने वाला चाँदी के कारीगरों का गाँव भी।
दंगह्यांग अस्तापाक की विरासत
गाँव का नाम Buda (बुद्ध) और जावा में पूर्वजों के क्षेत्र Keling से बना है। यहाँ खास भव्य इमारतें नहीं, बल्कि पुरोहितों की जीवित वंशपरंपरा है।
- दंगह्यांग अस्तापाक — बौद्ध पंडित, दंगह्यांग अंगसोका के पुत्र और दंगह्यांग निरार्थ (इदा पेदांडा सक्ति वावु रौह) के भतीजे। राजा दालेम वातुरेंगोंग के निमंत्रण पर बाली आए और 15वीं–16वीं सदी में बुदाकेलिंग में बस गए।
- पुरा तामन तनजुंग और पुरा तामन सारी की देखरेख उनके वंशज, बौद्ध ब्राह्मण करते हैं; बड़े अनुष्ठान लगभग हर तीस साल में एक बार होते हैं।
- ग्रिया तामन सारी और ग्रिया देमुंग से आज भी बौद्ध पेदांडा निकलते हैं, जो शैव पेदांडा के साथ जोड़े में अनुष्ठान संपन्न कराते हैं।
- इदा पेदांडा माडे सिदेमेन (1858–1984), सानुर में जन्मे कवि-पुरोहित जिन्होंने अपना जीवन बुदाकेलिंग में बिताया।
चाँदी, सोना और घर के आँगन की कार्यशालाएँ
बुदाकेलिंग लंबे समय से चेलुक के समानांतर उम्दा चाँदी के लिए जाना जाता है, पर इसकी शक्ल बिल्कुल अलग है: वातानुकूलित शोरूम नहीं, बल्कि छोटे हथौड़े, ब्लोटॉर्च की लौ और हाथ की नक्काशी वाला घरेलू उद्योग।
- चाँदी, सोना और धातु की ढलाई दुकान के नहीं, परिवार के समय पर चलती है — सुबह से देर दोपहर तक।
- कई कार्यशालाएँ निजी आँगनों के भीतर हैं; भीतर जाने या तस्वीर लेने से पहले अनुमति लें।
सारेन जावा में अंतरधार्मिक मेगिबुंग
गाँव के एक छोर पर बंजार सारेन जावा है, सदियों पुराना मुस्लिम मोहल्ला, जहाँ बाली के मंदिरों जैसी बहुस्तरीय छतों वाली दो पवित्र मस्जिदें और देमाक से आए विद्वान रादेन कियाई अब्दुल जलील की मज़ार है। हर 10 मुहर्रम को निवासी हौल का आयोजन करते हैं और अपने हिंदू पड़ोसियों को साथ भोजन के लिए बुलाते हैं। मेगिबुंग परंपरा — एक ही थाल के गिर्द गोल घेरे में बैठकर खाना — यहाँ धर्म की सीमाएँ लाँघ जाती है।
व्यावहारिक जानकारी और बुकिंग
- स्थान: गूगल मैप्स पर देखें
- समय और टिकट: गाँव पूरे दिन खुला रहता है और कोई प्रवेश शुल्क नहीं है; मंदिर में प्रवेश करने या पेमंगकु के स्वागत पर लगभग 20–50 हज़ार रुपिया का स्वैच्छिक दान (पुनिया) साथ रखें।
- रास्ता: अमलापुरा लगभग 15 मिनट (7 किमी), तिर्ता गंगा लगभग 10 मिनट, चंडीदासा लगभग 45 मिनट, आमेद लगभग 40 मिनट, देनपासार लगभग 2 घंटे।
- बुकिंग: बिना पूर्व सूचना के भी जा सकते हैं; चाँदी की कार्यशाला देखने या अनुष्ठान की अनुमति के लिए आधिकारिक साइट budakeling.desa.id के ज़रिए बुदाकेलिंग ग्राम कार्यालय से पहले संपर्क करें।
- शिष्टाचार: मंदिर परिसर में सारोंग और कमरबंद पहनें, पेदांडा या अनुष्ठान की तस्वीर लेने से पहले अनुमति लें, और अनुष्ठानिक अशुद्धि (चुन्ताका) की स्थिति में मंदिर में प्रवेश न करें।
- सोशल मीडिया: इंस्टाग्राम पर खोजें
पूर्वी बाली में ठहरकर आधे दिन की धीमी यात्रा में बुदाकेलिंग सबसे अच्छा लगता है; AccessiaPass पर चंडीदासा, आमेद या सिदेमेन के ठहरने के वाउचर की कीमतें तुलना कर बुक कर लें ताकि लौटते समय जल्दबाज़ी न करनी पड़े।
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