बन्युसेरी गाँव (Banyuseri) सिंगाराजा शहर से लगभग 20 किमी दक्षिण में, बुलेलेंग ज़िले के बंजार क्षेत्र में, करीब 600 मीटर की ऊँचाई पर है। यह SCTPB नाम से जाने जाने वाले पाँच बाली आगा (Bali Aga) पुराने गाँवों (सिदातापा, चेम्पागा, तिगावासा, पेदावा, बन्युसेरी) में से एक है और सबसे कम चर्चित भी। फिर भी यहाँ धातु की सात अभिलेख-पट्टिकाएँ सुरक्षित हैं, जिनकी वजह से कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि बन्युसेरी कभी आसपास के पुराने गाँवों का केंद्र था।
जाने से पहले: आम गलतफहमियाँ
- कोई टिकट काउंटर नहीं है। पर्यटन मंत्रालय के Jadesta पोर्टल पर यह गाँव अभी "शुरुआती चरण" के पर्यटन गाँव के रूप में दर्ज है। भ्रमण स्थानीय पर्यटन समूह (Pokdarwis, अध्यक्ष I Putu Sudiarta) गतिविधि पैकेज के रूप में कराता है, प्रवेश टिकट के रूप में नहीं।
- अभिलेख प्रदर्शित नहीं हैं। बुलेलेंग के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अनुसार, ये पट्टिकाएँ 1950 में पान सार्ती नाम के ग्रामीण को अपने बाग में मिलीं, 28 नवंबर 1988 को शिक्षा विभाग की टीम ने इनकी जाँच की, और अब ये पुरा देसा बन्युसेरी में रखी हैं। अधिकांश अक्षर जंग से मिट चुके हैं। ये पवित्र वस्तुएँ हैं, इसलिए फोटो लेने की उम्मीद न करें।
- दिखाया जाने वाला पारंपरिक घर प्रतिकृति है। ज़िला सरकार की Visit North Bali साइट एक प्रतिकृति घर का वर्णन करती है, जिसमें दिखता है कि लोग एक ही कमरे में खाना बनाते, सोते और पूजा करते थे। अगर आपका मुख्य उद्देश्य आज भी बसे हुए असली घर देखना है, तो सिदातापा गाँव बेहतर है।
- अभी कोई होमस्टे नहीं है (Jadesta के आँकड़ों के अनुसार)। रात लोविना में बिताने की योजना बनाएँ।
- बाली आगा गाँवों के शिष्टाचार का पालन करें। मंदिर क्षेत्र में बुलाए जाने पर सारोंग और कमरबंद पहनें, लोगों की फोटो लेने से पहले पूछें, और बिना साथ के किसी घर के आँगन में न जाएँ।
यहाँ क्या कर सकते हैं
बन्युसेरी की सबसे जीवंत गतिविधि "केले-केले" शहद के इर्द-गिर्द है, जो बिना डंक वाली मधुमक्खियों (क्लांचेंग/ट्रिगोना) का शहद है। I Putu Sudiarta इसे 2017 से "Madu Bali Aga" नाम से विकसित कर रहे हैं। बुलेलेंग की अनुसंधान एवं नवाचार एजेंसी (BRIDA) के अनुसार जुलाई 2024 में मधुमक्खी पालन समूह में 31 सदस्य थे और छात्र तथा विदेशी पर्यटक नियमित आते हैं। आप छत्ते के डिब्बे खुलते देख सकते हैं और खट्टा-मीठा शहद चख सकते हैं।
Jadesta पर दर्ज अन्य पैकेज: बाँस की बुनाई, पारंपरिक नारियल तेल बनाना, बाँस के जंगल से होकर झरने तक ट्रेक, और तुम बोंगकोत व जुकुत लंजांग जैसे स्थानीय व्यंजन बनाना। Jadesta पर शहद निकालने का अनुभव 50,000 रुपिया और बाँस बुनाई 1,50,000 रुपिया (लगभग 260 और 780 भारतीय रुपये) लिखा है, लेकिन उसी पेज के कुछ अन्य आँकड़े साफ तौर पर पुराने हैं। इन्हें मोटा अनुमान मानें और पहले पुष्टि करें (सितंबर 2026 में जाँचा गया)।
ताड़ की चीनी और बाँस के घर देखने हों तो पूर्व में सटे पेदावा गाँव को साथ जोड़ लें।
लोविना से पहुँचना और व्यावहारिक जानकारी
- स्थान: Google Maps पर देखें। कालिबुकबुक (लोविना) से सेरिरित-सिंगाराजा सड़क और फिर खड़ी गाँव की सड़क से लगभग 18 किमी। तीखे मोड़ों की वजह से 35-45 मिनट रखें।
- किस रास्ते से बचें: तिगावासा-तेमुकुस होकर लोविना जाने वाला शॉर्टकट कई जानलेवा दुर्घटनाओं के बाद बुलेलेंग सरकार के अनुरोध पर 2024 में Google Maps से हटा दिया गया। अगर कोई पुराना नेविगेशन ऐप इसे सुझाए तो नज़रअंदाज़ करें।
- वाहन: अच्छे ब्रेक वाला स्कूटर, या स्थानीय ड्राइवर के साथ छोटी कार। बड़ी मिनीबसों को दिक्कत होती है।
- गाइड और बुकिंग: Pokdarwis का संपर्क Jadesta पोर्टल पर बन्युसेरी के पेज पर दिया है। कम से कम एक दिन पहले सूचना दें।
- सोशल मीडिया: Instagram पर खोजें।
अगर आप तैयार-शुदा आकर्षण चाहते हैं तो यह जगह ठीक नहीं: Pokdarwis से पहले बात किए बिना आप बस बिना सूचना-पट्ट वाले एक शांत गाँव से गुज़र जाएँगे। बाँस शिल्प के ज़्यादा कारीगर देखने हों तो उत्तर में कुछ ही किलोमीटर पर तिगावासा है। सुबह आएँ, क्योंकि बरसात के मौसम में इन पहाड़ियों पर दोपहर बाद धुंध और बारिश ज़्यादा होती है।
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